1988 के बाद सबसे भयानक बाढ़
पंजाब इन दिनों 1988 के बाद की सबसे बड़ी बाढ़ का सामना कर रहा है। इस आपदा से 23 जिले प्रभावित हैं और अब तक 37 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। करीब 3.55 लाख लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं और हजारों गाँवों में पानी भरा हुआ है।
खाने-पीने की चीज़ों पर असर
बाढ़ की वजह से सब्ज़ियों और फलों की सप्लाई चेन टूट गई है।
लुधियाना समेत कई शहरों में सेब ₹200 किलो, आलू–प्याज़ और हरी सब्ज़ियाँ भी सामान्य दाम से काफी महँगी बिक रही हैं।
किसानों की 1.75 लाख हेक्टेयर फसलें पानी में डूब गईं, जिससे आने वाले हफ्तों में अनाज और सब्ज़ियों की भारी कमी देखने को मिल सकती है।
मंडियों तक ट्रांसपोर्ट ठप होने से रोज़मर्रा के खाने-पीने के सामान का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है।
राहत और सरकारी इंतज़ाम
पंजाब सरकार ने 71 करोड़ रुपये की राहत राशि जारी की है।
सभी स्कूल और कॉलेज 7 सितंबर तक बंद कर दिए गए हैं ताकि लोगों की सुरक्षा और राहत कार्यों पर फोकस रह सके।
भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन राहत’ के तहत 50 से ज़्यादा कॉलम तैनात किए हैं। अब तक 5,500 लोग सुरक्षित निकाले जा चुके हैं और करीब 27 टन राशन और ज़रूरी सामान बाँटा गया है।
ड्रोन के ज़रिए भी दूरदराज़ इलाकों में खाना और दवाइयाँ पहुँचाई जा रही हैं।
आर्थिक मदद और मांगें
लुधियाना की MSME फ़ोरम ने केंद्र सरकार से ₹1 लाख करोड़ के राहत पैकेज की मांग की है, ताकि उद्योग और किसान दोनों को राहत मिल सके।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी केंद्र से ₹60,000 करोड़ की राहत और किसानों को मुआवज़ा बढ़ाकर ₹50,000 प्रति एकड़ करने की मांग की है।
नतीजा – जनता पर दोहरी मार
इस बाढ़ ने लोगों की ज़िंदगी पर सीधा असर डाला है।
एक तरफ़ जान-माल का नुकसान और बेघर होने की समस्या।
दूसरी तरफ़ खाने-पीने की चीज़ों की महंगाई, जिसने आम आदमी की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
राहत और बचाव कार्य ज़ोरों पर हैं, लेकिन जब तक पानी पूरी तरह नहीं उतरता, तब तक महंगाई और खाने-पीने की कमी बड़ी चुनौती बनी रहेगी।
